20 साल का केस और 5 साल की सजा।

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बात हो रही है सलमान खान की। सलमान खान, वर्तमान हिंदी फिल्म उद्योग का व पूरे देश का एक जाना-पहचान नाम। जिनका किसी फिल्म में होना आज उस फिल्म की ना सिर्फ सफलता की गारंटी है, बल्कि उस फ़िल्म से कमाई के मामले में सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ देने की उम्मीद की जाती है। सलमान खान आज वो नाम है जिनकी फिल्म्स, जिनके फैंस को क्रिटिक्स की रेटिंग से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अपनी फिल्मों में लार्जर दैन लाइफ किरदार निभाने वाले सलमान को असल जिंदगी के फिल्मों से अलग होने का अंदाजा बृहस्पतिवार को हो गया होगा जब विलुप्तप्राय जीव काला हिरण के शिकार के मामले में जोधपुर की अदालत ने सलमान को दोषी मानते हुए 5 साल कारावास और 10,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। सलमान के अलावा अन्य आरोपी सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे, नीलम कोठारी व एक स्थानीय, दुष्यंत सिंह, जो उस समय कलाकारों की जिप्सी के ड्राइवर थे, सबूतों के अभाव में बरी हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला ?

बात आज से 20 साल पहले 1998 की सर्दियों की शुरुआत की है। जब मौसम गुलाबी होना शुरू ही हुआ था, उसी समय गुलाबी शहर जयपुर से तकरीबन 350 किलोमीटर दूर जोधपुर में एक मल्टीस्टारर फ़िल्म, हम साथ-साथ हैं, की शूटिंग चल रही थी। जिसमें सलमान के अलावा सैफ अली खान, मोहनीश बहल, तब्बू, सोनाली बेंद्रे, आलोकनाथ जैसे उस समय के बड़े नाम थे। दिन में फ़िल्म की शूटिंग के बाद रात में लगभग नियमित तौर पे सलमान और साथ के कलाकार शिकार पर जाते थे। 1 अक्टूबर, 1998 की रात कांकाड़ी इलाके में शिकार पर गए इन लोगों ने दो काले हिरणों का शिकार किया। काले हिरण के विशिष्ट जीव होने के कारण इनका शिकार ना सिर्फ प्रतिबंधित है, बल्कि उस जगह के विश्नोई समाज के लोग इस जीव में काफी श्रद्धा भी रखते हैं। विश्नोई समाज के लोग काले हिरण को अपने गुरु भगवान जांबाजी उर्फ जम्बेश्वर भगवान का अवतार मानते हैं।

गोली चलने की आवाज सुनकर गांववालों की नींद खुल गई और वो लोग मोटरसाइकिल से गोली की आवाज की दिशा में गए। विश्नोई समाज के लोगों ने कोर्ट को दिए अपने बयान में कहा कि घटनास्थल पर जब वो लोग पहुंचे तब जिप्सी में बैठे सलमान के हाथों में बंदूक थी और सैफ सहित अन्य आरोपी भी वहीं जिप्सी में बैठे थे। गांववालों ने जब पीछा किया तो वो लोग जिप्सी से वहाँ से भाग निकले। गांव के लोगों ने शव वन विभाग को सौंप दिया।

कोर्ट में मामला व जांच प्रक्रिया।

1 अक्टूबर की रात तमाम चीजें होने के बाद 2 अक्टूबर को विश्नोई समाज के लोगों ने वन विभाग को शव सौंपने के बाद वन विभाग में ही सलमान व अन्य 6 लोगों पर शिकायत दर्ज कराई। उस समय मामले के 4 प्रत्यक्षदर्शी बताए गए, छोगाराम, पूनम चंद, शेराराम, और मांगीलाल। 7 अक्टूबर को यह जांच तत्कालीन वन विभाग एसीएफ ललित बोड़ा को जांच सौंपी गई। अदालत ने सलमान को चार दिन की रिमांड पर बोड़ा को सौंप दिया था। कड़ाई से पूछताछ करने पर सलमान ने बोड़ा पर कुर्सी तक फेंक दी थी। ललित बोड़ा को जांच के दौरान राजनीतिक दबाव भी झेलना पड़ा। पर्दे पर सलमान की माँ का किरदार कर चुकी बीना काक उस समय राजस्थान में कांग्रेस की तत्कालीन राज्य सरकार में मंत्री थीं। उनपे साक्ष्यों को मिटाने व जांच को प्रभावित करने जैसे आरोप भी लगे थे। केस की पहली रिपोर्ट में कहा गया कि एक हिरण की मौत दम घुटने और दूसरे हिरण की मौत गड्ढे में गिरने और कुत्तों के खाने के कारण हुई थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह रिपोर्ट सही नहीं है, क्योंकि इसमें गोली लगने की बात नहीं थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठाया गया। बोर्ड ने दूसरी रिपोर्ट में दोनों हिरणों की मौत गोली लगने से ही बताई। बोड़ा ने शिकार में इस्तेमाल जिप्सी बरामद की थी जिस पर से मिले खून के धब्बों का इस केस में आरोप तय करने व शिकारी को सलाखों के पीछे पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। तमाम वजहों व सुस्त रफ्तार न्यायिक प्रक्रिया की वजह से 20 साल लंबे चले केस में आखिरकार बृहस्पतिवार को कोर्ट ने सलमान को 5 साल की सजा सुनाई।

कोर्टरूम बहस व सजा।

कोर्ट में बचाव पक्ष ने कहा कि मुलजिम अभिनेता हैं, यदि उसे कारावास भेजा जाता है तो अनेक लोगों की रोजी-रोटी पर फर्क पड़ेगा। मुलजिम के खिलाफ वर्तमान समय तक पूर्व के किसी भी प्रकरण में दोष सिद्धि नहीं है। मुलजिम 20 वर्षों से तनाव झेल चुके हैं। अनुशासित होने के कारण मुलजिम को जब भी बुलाया गया, वह आया है और वन विभाग की हिरासत भी भुगत चुका है अतः सजा में नरमी बरती जाए।

इसके पक्ष में अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि अभियुक्त ने बहुचर्चित अभिनेता होने के बावजूद लुप्तप्राय प्रजाति के दो काले हिरणों का शिकार किया। आम जनता इनका व इनके जैसे लोगों का अनुसरण करते हैं। मुलजिम के इस कृत्य से उसे अधिकतम सजा होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की नरमी न्यायोचित नहीं होगी।

विवादों से गहरा रिश्ता।

1 अक्टूबर की रात के इस शिकार प्रकरण से पहले 27 सितंबर, 1998 और 28 सितंबर, 1998 को क्रमशः 1 व 2 हिरणों के शिकार में सलमान पर मुकदमे चल रहे हैं। दोनों ही मामलों में निचली अदालतों से दोषी और उच्च न्यायालयों से बरी सलमान के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमे लंबित हैं। आर्म्स एक्ट में बिना लाइसेंस वाली राइफल और रिवाल्वर रखने के जुर्म में भी सलमान पर केस था। इसके अलावा सलमान का कुख्यात हिट एंड रन केस भी है। इसके अलावा फिल्मों के सेट पर नशे में जाकर गर्लफ्रेंड अभिनेत्रियों को गालियां देना, रिलेशनशिप में रहते हुए अभिनेत्रियों के साथ मार-पीट, विवेक ओबेरॉय को धमकियाँ व हालिया गायक अरिजीत सिंह का विवाद भी सलमान से जुड़ा रहा है।

फिलहाल जोधपुर जेल की बैरक नंबर 2 में कैदी नंबर 106 सलमान खान को रखा गया है। बृहस्पतिवार को ही सेशंस कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई गई थी पर सुनवाई शुक्रवार के लिए टाल दी गयी थी, लेकिन शुक्रवार को भी सुनवाई नहीं हो सकी। पुलिस ने जेल प्रशासन को पत्र लिखकर सलमान की सुरक्षा के कड़े इंतजामात करने को कहा है क्योंकि कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई ने कुछ ही महीने पहले कोर्ट में पेशी के दौरान सलमान को जान से मारने की धमकी दी थी।

अपनी फिल्मों में हीरो बनकर जुर्म से लड़ते सलमान ने खुद एक जुर्म किया व उसमें फंसे हुए नजर आ रहे हैं। आज नहीं तो कल सलमान को यह सजा भुगतनी ही पड़ सकती है। हालांकि उनपर यह इकलौता आरोप भी नहीं है। विवादों से घिरे रहे इस सुपरस्टार ने अच्छे काम भी किए परंतु न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार यदि आपने जुर्म किया तो सजा तो मिलेगी ही। सलमान के पास हालांकि अभी ऊपरी न्यायालयों में जाने का अधिकार है। हो सकता है आज, यानी शनिवार को, सलमान को जमानत भी मिल जाए। केस अभी भी खुला हुआ ही है। आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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