फेसबुक डेटा ब्रीच और कैम्ब्रिज एनालिटिका।

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आप फेसबुक पर हैं और ठीक-ठाक सक्रिय हैं तो पिछले एक हफ्ते में ‘फेसबुक डेटा लीक’ और ‘कैम्ब्रिज एनालिटिका’ का जिक्र सैकड़ों बार सुना ही होगा। 21 मार्च को तो भारत सरकार के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहाँ तक कहा कि जरूरत पड़ने पर फेसबुक को तलब भी किया जा सकता है। इन दिनों ये दोनों नाम खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। लेकिन इसकी वजह क्या है ? ये दोनों आपस में कैसे जुड़े हैं और भारत से इसका क्या संबंध है ? आइए, बताते हैं।

फेसबुक पर आरोप हैं कि उसने अपने तकरीबन 5 करोड़ उपयोगकर्ताओं का डेटा चुरा कर कैम्ब्रिज एनलिटिका नाम की एक कंपनी को दिया। ये एक ऐसा मामला है जिसकी वजह से फेसबुक को अब तक करोड़ों का नुकसान हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के समय जब कहा गया कि ट्रंप को पुतिन ने अपने फायदे के लिए खड़ा किया है, वो सवाल फिर से जाहिर हो गए हैं, भारत में भी कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे पर इस फर्म की सेवाएं लेने का आरोप लगा रहे हैं।

कैम्ब्रिज एनलिटिका क्या है ?

कैम्ब्रिज एनलिटिका एक ब्रिटिश राजनीतिक परामर्श (पोलिटिकल कंसल्टिंग) फर्म है जो डेटा का अध्ययन कर के नए निष्कर्ष या सूचनाएं निकालती है। ये 2013 में SCL समूह की एक शाखा के रूप में शुरू हुआ था। इस फर्म ने 2015 में टेड क्रूज़ और 2016 में डॉनल्ड ट्रंप को उनके राष्ट्रपति चुनावों के कैम्पेन के लिए अपनी सेवाएं दी थीं। इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम के यूरोपीय संघ से अलग होने के लिए ‘Leave EU’ अभियान से भी ये फर्म जुड़ा था।

अगर भारत में 2014 के चुनावों पर आपकी नजर थी तो आपने प्रशांत किशोर का नाम सुना होगा। वो राजनीतिक परामर्शदाता है। माने कि वो राजनीतिक पार्टियों को चुनाव जीतने के रास्ते सुझाते हैं और सोशल मीडिया पर और डिजिटल कैम्पेनिंग वगैरह देखते हैं। कुछ ऐसा ही काम ये कंपनी (कैम्ब्रिज एनलिटिका) करती है।

हालांकि इस फर्म का किरदार इन सबमें विवादास्पद रहा है और इनके ऊपर इन दोनों ही देशों में आपराधिक जांच चल रही है।

हालिया विवाद।

‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ और ‘द ऑब्जर्वर’ ने सबसे पहले ये रिपोर्ट पेश की कि कैम्ब्रिज एनलिटिका फेसबुक से यूज़र्स के डेटा चुरा कर उनका उपयोग अपने काम के लिए कर रही है। ये फर्म लोगों का डेटा बिना उनकी इजाजत और जानकारी के ले रहा था। इस खुलासे के बाद एक ब्रिटिश न्यूज़ चैनल ‘चैनल 4 न्यूज़’ ने इस फर्म के सीईओ अलेक्जेंडर निक्स पर एक स्टिंग किया जिसमें निक्स कह रहे हैं कि वो नेताओं को वेश्याओं (प्रोस्टिट्यूट्स), घूस और कुछ लालच देकर फंसा सकते हैं। ये सब सामने आने के बाद से कंपनी के लिए मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं।

फेसबुक और हमारा-आपका डेटा।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान विभाग में लैक्चरर रह चुके एलेक्सान्दर कोगन ने ‘This Is Your Digital Life’ नाम की एक व्यक्तित्व परीक्षण (पर्सनालिटी टेस्ट) की ऐप बना कर फेसबुक पर डाली जिसमें लोग बिना सोचे-समझे लॉग-इन करते गए। इस ऐप ने ना सिर्फ उन लोगों की जानकारी जमा कि जिन्होंने इसमें लॉग-इन किया, बल्कि उनके दोस्तों का भी डेटा जमा किया। पूर्व में फेसबुक में काम करने वाले सैंडी पराकिलास ने कहा कि ऐप ने परमिशन के नाम पर फेसबुक सर्वर से लोगों के ई-मेल एड्रेस और यहाँ तक कि निजी संदेश भी हासिल किए और उसको तीसरी पार्टी तक पहुंचाए जिससे उसका मन मुताबिक इस्तेमाल हो सके।

इन सबसे किसको कितना फायदा हुआ ये तो नहीं पता लेकिन इस तमाम डेटा का इस्तेमाल अमेरिकी चुनाव में ट्रंप कैम्पेन को फायदा पहुंचाने के लिए हुआ, ये तय है। ये बात कंपनी के ही एक पूर्व कर्मचारी क्रिस्टोफर विली ने प्रेस में बताई है। उन्होंने बताया कि कैसे कैम्ब्रिज एनलिटिका ने फेसबुक से डेटा लेकर उसका इस्तेमाल लोगों को टारगेट करके ऐड कैम्पेन चलाने के लिए किया गया।

फेसबुक को नुकसान।

इस पूरे घटनाक्रम से फेसबुक को बहुत नुकसान हुआ है। ना सिर्फ व्यावसायिक व आर्थिक रूप से, वरन् व्यावहारिक रूप से भी। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेसबुक का जो स्टॉक प्राइज़ 16 मार्च, शुक्रवार को 185.09 यूएस डॉलर प्रति शेयर पर बंद हुआ था, ये खबर निकलने के बाद वही शेयर सोमवार 19 मार्च को 170.12 यूएस डॉलर, मतलब लगभग 8.1 प्रतिशत तक गिर गया। ये गिरावट हफ्ते के अंत तक जारी रही। शुक्रवार तक फेसबुक के स्टॉक प्राइज़ में और 3.3 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली और हफ्ते का समापन 159.39 यूएस डॉलर प्रति शेयर के साथ हुआ। 1 हफ्ते में फेसबुक के शेयर्स में लगभग 14 प्रतिशत तक गिरावट देखने को मिली जो कि फेसबुक का पिछले साढ़े पांच-छः साल में सबसे बुरा प्रदर्शन है। कंपनी की मार्केट वैल्यू को भी इस घटना से एक दिन में 43 बिलियन डॉलर तक का नुकसान हुआ है।

जुकरबर्ग को खुद निजी तौर पे 5 बिलियन डॉलर्स का नुकसान हुआ। उनकी संपत्ति 74.5 बिलियन डॉलर से 69.3 बिलियन डॉलर पे आ गई। इस नुकसान से वो फोर्ब्स की दुनिया भर के खरबपतियों की रियल टाइम रैंकिंग में पांचवें से सातवें स्थान पर आ गए।

इतिहास के शायद सबसे बड़े डेटा ब्रीच स्कैण्डल के बाद सिलिकॉन वैली भी 2 भागों में बंटी नजर आ रही है। वर्तमान समय में फेसबुक के मालिकाना हक वाले व्हाट्सएप्प के सह-संस्थापक ब्रायन ऐक्टन ने जहाँ पहले ही ट्वीट कर कहा था कि अब फेसबुक को अपने फोन्स से डिलीट करने का समय आ गया है। और इसके साथ उन्होंने ट्विटर पर ट्रेंड चलाने के लिए #deletefacebook का इस्तेमाल किया, वहीं अब टेस्ला व स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क ने भी इस हैशटैग को जॉइन करते हुए ब्रायन के ट्वीट का जवाब में लिखा कि ‘फेसबुक क्या है ?’ बाद में मस्क ने अपनी कंपनियों के फेसबुक पेज भी डिलीट कर लिए। सीनेटर मार्क वार्नर और एमी क्लोबुचर ने मार्क जुकरबर्ग को अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेड़ होने को कहा है। एक ब्रिटिश सांसद ने जुकरबर्ग को एक पत्र के माध्यम से ब्रिटिश संसद के सामने पेश होने को कहा है। एक समिति जांच कर रही है कि क्या फेसबुक ने 2011 के कंसेंट आधारित नियमों का उल्लंघन किया है या नहीं। फेसबुक के एक शेयरहोल्डर ने भी फेसबुक के खिलाफ मुकदमा किया है। कंपनी के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर, एलेक्स स्टमॉस भी कंपनी छोड़ने का मन बना रहे हैं, ऐसी खबरें हैं।

भारत में कैम्ब्रिज एनलिटिका।

भारत की दोनों राष्ट्रीय स्तर की पार्टियां, भाजपा व कांग्रेस, एक दूसरे पे आरोप लगा रही हैं कि उन्होंने कैम्ब्रिज एनलिटिका की सेवाएं ली हैं लेकिन खुद इसकी सेवाएं लेने से इंकार कर रही हैं। हालांकि ‘चैनल 4 न्यूज़’ के स्टिंग में खुद कंपनी के सीईओ ने कहा कि उन्होंने भारत में भी काम किया है।

इसकी पुष्टि इस कंपनी की वेबसाइट से भी होती है। कंपनी के वेबसाइट के पॉलिटिकल सेक्शन में जाकर केस स्टडीज़ में ‘एशिया एंड द मिडल ईस्ट’ में इंडिया वाले भाग में देखने पर पता चलता है कि 2010 बिहार विधानसभा चुनावों के लिए इस फर्म से संपर्क किया गया था। हालांकि इसमें किसी पार्टी का नाम नहीं है लेकिन शक तत्कालीन भाजपा-जद(यू) गठबंधन पर जाता है क्यूँकि जैसा कि कंपनी ने लिखा है, उन्होंने जिन सीटों पर काम किया था उनमें से 90% सीटों पर जीत के साथ उनके क्लाइंट (वो पार्टी जिसने उनकी सर्विस ली) ने चुनावों में बड़ी जीत दर्ज की।

जद (यू) नेता के सी त्यागी के बेटे अमरीश त्यागी के कंपनी OBI और SCL, जो कि कैम्ब्रिज एनलिटिका की मालिक कंपनी है, पार्टनर कंपनियां हैं। हालांकि OBI किसी भी प्रकार का नियम तोड़ने से इंकार कर रही है।

फेसबुक डेटा का असर चुनावों पर कैसे होता है ?

कभी आपने सोचा है कि ‘अमेज़न के ऐप पे’ नाइकी की चप्पल खोजने के बाद ‘फेसबुक पे’ आपको चप्पल के ऐड ही क्यूँ दिखते हैं ? या फिर एक घर खरीदने के लिए एक जगह लोन का पता कीजिए तो कैसे आपको धकाधक लोन वालों के मेल आने लगते हैं ? आप इनसे परेशान भी रहते हैं लेकिन कभी 2 मिनट बैठ के सोचा नहीं होगा। इंटरनेट पे आप जो भी कर रहे हैं, जो कुछ भी, वो सब कुछ रिकॉर्ड हो रहा है। फेसबुक आज ऑनलाइन विज्ञापन जगत में बहुत बड़ा नाम है। इसकी कमाई का बहुत ही बड़ा हिस्सा इसके विज्ञापनों से आता है। इसीलिए फेसबुक ने अपने सॉफ्टवेयर को इस तरह से प्रोग्राम किया है जिससे वह आपको आपकी पसंद की चीज दिखा सके। जब आप अमेज़ॉन पे किसी चप्पल पे क्लिक करते हैं तो वो जानकारी कंपनियों द्वारा फेसबुक को दी जाती है और फिर फेसबुक आपको उसी तरह के विज्ञापन दिखाता है। फेसबुक आपको दिमाग में वो विज्ञापन या वो ब्रांड स्थापित कर देगा।

ऐसा ही चुनावों के साथ भी होता है। एक इंसान की मानसिकता समय के साथ बदलती रहती है लेकिन फेसबुक पर अगर आप थोड़ा भी सेंटर तो लेफ्ट हैं तो फेसबुक आपको वैसे ही लोगों तक पहुंचाएगा। ऐसी स्थिति में आप अगर अपनी मानसिकता बदलना भी चाहें तो मुश्किल होगा क्यूँकि आप लगातार वैसे ही लोगों के प्रभाव में थे।

फेसबुक उपयोगकर्ता आगे क्या करें ?

हालांकि ये भी कहा गया है कि फेसबुक को ये 2016 से ही पता था लेकिन फिर भी ज्यादा जरूरी है कि हम अपनी सुरक्षा अपने से करें। फेसबुक अपने ऐप/वेबसाइट पर सुरक्षा की गारंटी देने की बात करता है लेकिन जब भी हम मजे-मजे में ‘आपकी शक्ल किस एक्टर से मिलती है ?’ या फिर ‘जानें आपकी डिजिटल लाईफ के बारे में’ जैसे ऐप्स पर क्लिक कर के उनको हमारी प्रोफ़ाइल का एक्सेस देते हैं, हम अपनी प्राइवेसी जरूरत से ज्यादा शेयर कर रहे होते हैं। ये ऐप्स थर्ड पार्टी ऐप्स होते हैं जिनसे सुरक्षा की बात फेसबुक करता जरुर है लेकिन फिलहाल तो नाकाम रहा है। अतः ज्यादा जरूरी है कि ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल करने से बचें, प्रोफ़ाइल पे सिक्योरिटी सेटिंग्स में जाकर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन एनेबल कर लें ताकि कोई और कहीं और से आपका अकॉउंट ना खोल सके। बाकी BFF वगैरह लाख लिखते रहिए, उससे कुछ नहीं होने जा रहा। और एक बात फिर भी ध्यान रखें कि इंटरनेट पे प्राइवेसी नाम की कोई चीज नहीं होती।

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